Instagram पर CSAM विज्ञापन विवाद: केंद्र सरकार ने Meta को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम

भारत सरकार ने Meta को एक कड़ा नोटिस जारी करते हुए 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। मामला जुड़ा है Instagram पर चलाए जा रहे उन पेड विज्ञापनों से, जिनके बारे में आरोप है कि वे चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटीरियल (CSAM) से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा दे रहे थे। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि आखिर Instagram के विज्ञापन सिस्टम ने ऐसे विज्ञापनों को मंजूरी कैसे दी, और चेतावनी दी है कि इससे कंपनी की सेफ हार्बर सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

Source:इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों को मंजूरी देने पर भारत सरकार ने मेटा से मांगा जवाब, 7 दिनों का दिया समय

क्या है पूरा मामला?

यह नोटिस BBC Eye की एक जांच रिपोर्ट के बाद है, जो 3 जुलाई को प्रकाशित हुई थी। इस जांच में BBC ने भारत के भीतर एक टेस्ट अकाउंट बनाकर पाया कि प्लेटफॉर्म के विज्ञापन सिस्टम ने आपत्तिजनक कंटेंट को मंजूरी दे दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ विज्ञापनों में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया जो सीधे तौर पर बच्चों के शोषण से जुड़े कंटेंट की ओर इशारा करते थे, और यूज़र्स को टेलीग्राम के बाहरी लिंक्स पर भेजा जा रहा था।

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दिलचस्प बात यह है कि जब BBC के एक पत्रकार ने पहली बार इनमें से एक विज्ञापन की शिकायत की, तो Meta की अपनी रिव्यू टीम ने 24 घंटे बाद यह कहते हुए उसे क्लियर कर दिया कि यह कंपनी के कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन नहीं करता। केवल तब जब BBC ने सीधे कंपनी के अधिकारियों से संपर्क किया, तब जाकर Meta ने कुछ विज्ञापन हटाए, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया और कुछ बाहरी लिंक ब्लॉक किए।

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Meta

 सरकार का सख्त रुख

नोटिस कब जारी हुआ?

सरकार ने यह नोटिस शनिवार शाम को जारी किया। सूत्रों के मुताबिक, “MeitY ने Instagram को ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट बंद करने का आदेश दिया है जो CSEAM को बढ़ावा देते हैं या उस तक पहुंच आसान बनाते हैं।

Source:इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के मामले में केंद्र सरकार ने मेटा को नोटिस जारी किया

मंत्री का हस्तक्षेप

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई उस दिन के बाद हुई जब IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रालय के अधिकारियों को Instagram के विज्ञापनों को लेकर Meta को तलब करने का निर्देश दिया था।

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सेफ हार्बर पर खतरा

यह 7 दिन की समयसीमा महज़ औपचारिकता नहीं है। भारत के IT एक्ट के तहत, जो प्लेटफॉर्म सूचना मिलने के बावजूद गैरकानूनी कंटेंट पर कार्रवाई नहीं करते, वे सेक्शन 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा खो सकते हैं — जो इंटरमीडियरी को यूज़र्स के कंटेंट के लिए कानूनी दायित्व से बचाती है।

सरकार की चिंता किस पर सबसे ज्यादा?

रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय की चिंता का मुख्य केंद्र यह है कि प्लेटफॉर्म का ऑटोमेटेड रिव्यू सिस्टम उस कंटेंट को क्लियर कर रहा था, जिसे बाद में इंसानी जांच पकड़ पाई। नोटिस में खासतौर पर एल्गोरिद्म के ज़रिए इन विज्ञापनों के प्रचार-प्रसार को जांच का विषय बनाया गया है, न कि सिर्फ अलग-अलग विज्ञापनों को।

 यह पहला मामला नहीं

गौर करने वाली बात यह भी है कि यह हफ्ता Meta के लिए मुश्किलों भरा रहा। इसी हफ्ते बुधवार को केंद्र सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित यूज़रनेम फीचर को लेकर भी Meta को नोटिस भेजा था, जिसमें ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग और डिजिटल अरेस्ट स्कैम बढ़ने की आशंका जताई गई थी। सरकार ने इस फीचर को तब तक रोकने का निर्देश दिया जब तक बातचीत पूरी तरह संतोषजनक ढंग से नहीं हो जाती।

 टेलीग्राम का भी जिक्र

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि टेलीग्राम ने दावा किया है कि उसने साल 2026 में 2 लाख 74 हज़ार से ज्यादा CSAM से जुड़े ग्रुप्स और चैनलों को हटाया है, और ऑटोमेटेड व मानव मॉडरेशन के ज़रिए ऐसे कंटेंट के सार्वजनिक प्रसार को लगभग खत्म कर दिया है।

Source:

भारत ने मेटा को किया तलब: इंस्टाग्राम विज्ञापन विवाद की पूरी कहानी

 आगे क्या?

अब सबकी नज़र इस पर है कि Meta आने वाले 7 दिनों में सरकार को क्या जवाब देती है। भारतीय कानून के तहत, खासकर IT एक्ट की धारा 67B के अनुसार, ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटीरियल प्रकाशित करना या भेजना एक आपराधिक अपराध है। ऐसे में अगर Meta संतोषजनक जवाब नहीं दे पाती, तो कंपनी को कानूनी और नियामकीय दोनों मोर्चों पर बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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